ईश्वर तो शब्दातीत है

क्या ईश्वर सच में कोई देहधारी रूप है या सिर्फ एक परम ऊर्जा? जानिए कैसे ‘ईश्वर तो शब्दातीत है’ और किस तरह मंत्र विज्ञान हमारे भौतिक जगत को बदल सकता है। पूरी वैज्ञानिक और दार्शनिक व्याख्या ज्ञान विक्की (Gyan Wiki) पर

ईश्वर तो शब्दातीत है ईश्वर भार हीन,परम मोन, भाव है अनुभव है।
मैं शोक ,मोह ,पीड़ा सबसे परे हूँ, न जीत में न हार में, न मान में , न अपमान में, न जीवन मे , न मृत्यु में, न सत्य में , न असत्य में, मैं किसी में नही बंधा हु ,ये पूरी सृस्टि ही मैं हूँ
ईश्वर से संवाद की, ईश्वर से आपने लिए कुछ पाने का आपने काम के निमित्त एक मार्ग है हमारे पुराणों मे इसकी वैवस्था है मंत्र हैं विधान हैं हर कार्य सम्पन्न करने के अलग मंत्र अलग रूप होते हैं, भगवान एक ऊर्जा है देह धारी नही होता जिस तरह के रूप को हम जपते हैं मंत्र उस रूप का शुक्ष्म निर्माण करता है उस से साधक को भौतिक जगत मे आपने लिए बदलाव नजर आने लगते हैं
व्याख्या:-
साधक अपनी आवश्यकता, स्वभाव और काम के निमित्त (उद्देश्य) के अनुसार सही ऊर्जा मार्ग (Channel) का चुनाव करता है। पुराणों के विधान और नियम साधक को एक अनुशासन में बांधते हैं, जिससे ऊर्जा का क्षय (Waste) नहीं होता।
​3. भौतिक जगत में बदलाव: विचार से सृजन तक
​जब कोई साधक पूरी श्रद्धा, विधि और निरंतरता से मंत्र का जप करता है, तो उसके भीतर का ऊर्जा स्तर (Vibrational Frequency) बदलने लगता है।
​यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे: जो हमारे भीतर है, वही ब्रह्मांड में है। जब मंत्र के माध्यम से हमारे भीतर का सूक्ष्म जगत बदलता है, तो उसका सीधा असर हमारे बाहरी जीवन पर पड़ता है।
​आकर्षण का नियम (Law of Attraction): जब आपकी आंतरिक ऊर्जा उच्च और सकारात्मक होती है, तो आप भौतिक जगत में भी वैसी ही अनुकूल परिस्थितियों, अवसरों और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगते हैं।
​काम की सिद्धि: जिसे लोग चमत्कार या ईश्वर की कृपा कहते हैं, वह वास्तव में साधक की अपनी एकाग्र ऊर्जा होती है, जो भौतिक बाधाओं को भेदकर उसके काम को संपन्न करा देती है।
​निष्कर्ष: साधना का वास्तविक उद्देश्य
​ईश्वर से संवाद का अर्थ यह नहीं है कि ईश्वर सामने आकर बात करेगा। ईश्वर से संवाद का अर्थ है—अपने भीतर के मौन से जुड़ जाना।
​मंत्र और विधान उस ‘भारहीन’ और ‘शब्दातीत’ परम तत्व तक पहुँचने की सीढ़ियाँ हैं। जब मंत्र अपना काम करता है, तो साधक स्वयं उस ऊर्जा का हिस्सा बन जाता है और यही कारण है कि उसे अपने भौतिक जगत में बड़े और सकारात्मक बदलाव नजर आने लगते हैं। और ज़ब आपका यह दृष्टिकोण होगा तो यही अध्यात्म और विज्ञान का एक अद्भुत संगम बनता है । ये परमात्मा से मिलन है

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admin

Mantra gyan

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4 Responses

  1. VISHAL SHARMA says:

    acha guru ji mtlb ishwar se baat nahi kar skte fhir humare mann me kuch sawal ho to unke answer kaise milega

    • admin says:

      भगवान किसी के अंसार थोड़े देता मंत्र आपका कार्य करता है वह आंसर है

  2. Deepak sharma says:

    जय श्री राम
    जय श्री गुरूजी महाराज

  3. गीता गुप्ता says:

    बहुत सुंदर ।

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