भगवान

भगवान ➡️मैं ईश्वर,भगवान,देवता हूं, मेरे कई नाम कई रूप है,यह अखिल विश्व ब्रम्हांड, ये पूरी सृष्टि “मैं” ही हूं, मैं तटस्थ (न्यूट्रल) हूं, कोई मुझे न “अप्रिय” है और ना ही “प्रिय” है..ये पूरी सृष्टि मेरे ही अणु रूप है, जिस रूप में ध्यान करते हैं, सोचते हैं,जपन, यजन, हवन या जिन रूप का वर्णन करते हैं वह सभी रूप “मैं” ही हूं..
जिस प्रकार व्यक्ति तो एक है, पर वह कहीं पिता है, कहीं पति है, कहीं भाई है तो कहीं मामा है, उसी प्रकार मेरे अनेकों रूप अलग अलग कार्य और मानव कल्याण के लिए हैं.. “मैं भिन्न भिन्न रूप में होते हुए भी मैं एक ही हूं मैं ही “सर्वज्ञ” हूं ।” “ज्ञान में मैं वेद हूं मेरे तक पहुंचने का मार्ग पौराणिक तांत्रिक मंत्र जप और हवन है मैं मंत्र में वास करता “

अशोक भरद्वाज द्वारा लिखित
“मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ और मैं ही सभी प्राणियों की उत्पत्ति का, मैं ही सभी प्राणियों के जीवन का और मैं ही सभी प्राणियों की मृत्यु का कारण हूँ, कहने का तात्पर्य यह है कि सभी प्राणियों के आदि, मध्य और अंत में मै भगवान ही हूँ.”.
मैं सभी ज्योतियों में प्रकाशमान सूर्य हूँ,जितनी भी प्रकाशमान चीजें हैं, उनमें सूर्य मुख्य है,सूर्य के प्रकाश से ही सभी प्रकाशमान होते हैं,सृष्टि में निहित प्रकाश मै ही हूँ, मै ही सभी प्राणियों में चेतना स्वरूप जीवन-शक्ति हूँ..
यक्ष ,राक्षस, वसुओ, ऋषियों में, मै ही ऊर्जा स्वरूप हूँ..
मैं सभी वाणी में एक अक्षर (प्रणव) हूँ,मैं सभी प्रकार के यज्ञों में जप यज्ञ हूँ, और मैं ही सभी स्थिर (अचल) रहने वालों में हिमालय पर्वत , नित्य गति समुद्र, नित्य ज्वाला अग्नि एवं प्राण सुधा प्राण वायु भी मै ही हूँ…
मैं ही समस्त जड़ चेतन हूं

सर्व जगदि‍दं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः।
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्‌॥

मैं सब भूत भविष्य में समभाव से व्यापक हूँ, न कोई मेरा अप्रिय है और न प्रिय है, परंतु जो भक्त मुझको भक्ति भाव से भजते हैं, वे मुझमें हैं और मैं भी उनमें प्रत्यक्ष प्रकट (जैसे सूक्ष्म रूप से सब जगह व्यापक हुआ भी अग्नि साधनों द्वारा प्रकट करने से ही प्रत्यक्ष होता है, वैसे ही सब जगह स्थित हुआ भी परमेश्वर भक्ति से भजने वाले के ही अंतःकरण में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होता है) हूँ

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admin

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13 Responses

  1. Yadav mukesh says:

    जय हो गुरुदेव जी की।
    चरण स्पर्श🙇🙏

  2. Aman hindu says:

    *जय जय सियाराम जय जय हनुमान संकटमोचन कृपानिधान 🛕*

  3. Sudarshan says:

    जय गुरुदेव

  4. Sher singh says:

    जय गुरुदेव जय श्री गणेश

  5. जितेन्द्र झा 'गुड्डू' says:

    🙏🙏🙏

  6. Khushal trivedi says:

    हर हर महादेव🙏

  7. Deepak says:

    जय हो गुरुदेव

    जय श्री श्याम जय श्री राम

  8. पंकज कंवर says:

    सिद्धि विनायक गणपति महाराज की जय। प्रणाम गुरुदेव

  9. Mohan lal says:

    जय श्री गणेशाय नमः

  10. Giita says:

    हरि अनंत है।🙏

  11. स्वप्निल says:

    अतिसुन्दर पोस्ट

  12. VISHAL SHARMA says:

    good knowledge

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