‘श्री रुद्राष्टकम’ (Shri Rudrashtakam) यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के उत्तरकांड में रचा है।श्रोताओं के लिए पूरा स्तोत्र अर्थ सहित नीचे दिया गया है: श्री रुद्राष्टकम (Shri Rudrashtakam) नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं...
॥ श्री गणपति अथर्वशीर्ष ॥ (अर्थ सहित)शान्ति मन्त्रश्लोक:ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः। व्यशेम देवहितं यदायुः॥हिंदी अर्थ:हे देवताओं! हम अपने कानों से कल्याणकारी वचन सुनें। यज्ञ करने वाले हम अपनी आंखों से शुभ...
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