नील सरस्वती स्तोत्र

Introduction (प्रस्तावना):
सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र में मां सरस्वती के कई दिव्य स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें से एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्वरूप है—मां नील सरस्वती (Devi Neel Saraswati)। इन्हें दस महाविद्याओं में से दूसरी महाविद्या, माता तारा का ही एक रूप माना जाता है। जहाँ सामान्य रूप से मां सरस्वती शांत और सौम्य रूप में श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, वहीं नील सरस्वती मां का तांत्रिक और तीव्र स्वरूप है। इनकी आराधना से साधक को न केवल असीमित ज्ञान, बल्कि तीव्र बुद्धि, उत्कृष्ट तर्क शक्ति और वाक् सिद्धि (बोलने की अद्भुत कला) की प्राप्ति होती है।
​यदि आप एक विद्यार्थी हैं, शोधकर्ता (Researcher) हैं, या अपने कार्यक्षेत्र में बौद्धिक श्रेष्ठता हासिल करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं मां नील सरस्वती कौन हैं, उनका मंत्र क्या है और उनकी साधना कैसे की जाती है।
​मां नील सरस्वती कौन हैं? (Who is Goddess Neel Saraswati?)
​पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नील सरस्वती माता तारा का ही विग्रह हैं, जिनका रंग गहरा नीला है। तंत्र शास्त्र में इन्हें ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। नील सरस्वती को ‘नील तारा’ या ‘उग्र तारा’ भी कहा जाता है।
​लौकिक शिक्षा (Academic Education) के साथ-साथ अलौकिक या आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए इनकी साधना अचूक मानी गई है। जड़ से जड़ (मंदबुद्धि) व्यक्ति भी यदि सही विधि से इनकी शरण में जाए, तो वह परम विद्वान बन सकता है।

।।नीलसरस्वती स्तोत्र।।

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् I१I
ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते I
जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम् I२I

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि I
द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् I३I
सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोस्तुते I
सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् I४I

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला I
मूढतां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् I५I
वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः I
उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम् I ६I

देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे I
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् I७I
इन्द्रादिविलसद्द्वन्द्ववन्दिते करुणामयि I
तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम् I८I


अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां यः पठेन्नरः I
षण्मासैः सिद्धिमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा I९I
मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम् I
विद्यार्थी लभते विद्यां तर्कव्याकरणादिकम् I१०I

इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वितः I
तस्य शत्रुः क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते I११I
पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये I
य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशयः I१२I

।।इति नील सरस्वती स्तोत्रं संपूर्णं।।

​मां नील सरस्वती ज्ञान का वह महासागर हैं, जिनकी एक छोटी सी कृपा दृष्टि भी मनुष्य के जीवन का अंधकार मिटाकर उसे सफलता के शिखर पर पहुंचा सकती है। यदि आप भी अपनी बुद्धि, ज्ञान और करियर को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मां नील सरस्वती के इस दिव्य मंत्र का आश्रय लें।
​Disclaimer: ज्ञानविकी पर दी गई यह जानकारी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी विशेष तांत्रिक साधना को बड़े स्तर पर करने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ या गुरु की सलाह अवश्य लें।

हमारा चैनल सब्स्क्राइब करें
https://www.youtube.com/@Tantra.Philosophy


शंका समाधान या जानकारी के लिए mail करें

ashoksharma.125@gmail.Com

admin

Mantra gyan

You may also like...

1 Response

  1. हर्ष वर्धन दवे says:

    चरण स्पर्श गुरुदेव
    🙏🏻🙇🏻‍♂️🙏🏻
    जय गणपति जी की
    🙏🏻🙇🏻‍♂️🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *