कुलदेवी या कुलदेवता नाराज नहीं होते जानिए असली सच

कुलदेवी या कुलदेवता नाराज नहीं होते जानिए असली सच।सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक परिवार में कुलदेवी का स्थान सबसे ऊंचा और महत्वपूर्ण माना जाता है।हम अक्सर लोगों के मुंह से सुनते हैं कि हमारे देवी-देवता हमसे रुष्ट (नाराज) हो गए हैं, जिसके कारण जीवन में दुख आ रहे हैं। लेकिन क्या ईश्वर सच में किसी मनुष्य से नाराज हो सकते हैं? आइए आज इसके पीछे के असली अध्यात्म और विज्ञान को समझते हैं।
​क्या भगवान हमसे रुष्ट हो सकते हैं?
​भगवान कोई मनुष्य या व्यक्ति नहीं हैं जो किसी बात पर रुष्ट या नाराज हो जाएं। ईश्वर को मनुष्य से अपना कोई कार्य सिद्ध नहीं करवाना है, क्योंकि ब्रह्मांड का कोई भी ऐसा कार्य शेष नहीं है जिसे कोई साधारण व्यक्ति पूर्ण कर सके। भगवान की हमारे जैसी कोई भौतिक देह (शरीर) भी नहीं है, जो वह हमसे कुछ मांगें।
​भगवान वास्तव में एक परम ऊर्जा (Energy) हैं, जिसके खरबों रूप हैं और जिन्हें हम अलग-अलग देवी-देवताओं के नाम से पूजते हैं। ईश्वर सिर्फ और सिर्फ पुण्य स्वरूप हैं। जब भगवान साक्षात ऊर्जा का रूप हैं, तो वह भला आपसे रुष्ट क्यों होंगे? इस सृष्टि को रचने से पहले ही ईश्वर ने अपने सभी कार्य पूर्ण कर दिए थे, यह विशाल ब्रह्मांड ही उसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
​जीवन में आने वाले दुखों का असली कारण: हमारा कर्म
​हमारा यह जन्म और जीवन पूरी तरह से हमारे पूर्व जन्म के कर्मों पर आधारित होता है। पूर्व जन्म में हमने जैसे कर्म किए होते हैं, उसी आधार पर हमारा यह जीवन चलता है:
​शुभ कर्म: यदि हमारे पूर्व जन्म के कर्म अच्छे हैं, तो हम सुख-सुविधाओं और आनंद पूर्वक जीवन जीते हैं।
​अशुभ कर्म: जब जीवन में अशुभ या बुरे कर्मों का समय आता है, तब हमें कष्ट और दुख झेलने पड़ते हैं।
​इसी अशुभ समय और पाप कर्मों के प्रभाव को भस्म (दग्ध) करने के लिए शास्त्रों में देवत्व उपासना (ईश्वर की पूजा) का विधान बताया गया है।
​मंत्र जप कैसे काम करता है? (मंत्रों का विज्ञान)
​जब हम पूरे विश्वास के साथ किसी भी देवी या देवता के शरणागत होकर उनके मंत्र का जप करते हैं, तो वह मंत्र इस ब्रह्मांड में स्फुरित (Vibrate) होता है। मंत्र की शक्ति से वायुमंडल में उस देवता के स्वरूप के सूक्ष्म अणु एकत्र होने लगते हैं।
​जैसे-जैसे जप बढ़ता है, वैसे-वैसे हमारे पुराने पाप नष्ट होने लगते हैं और ‘नव-कर्म’ (नए शुभ कर्मों) का निर्माण होने लगता है, जो आगे चलकर हमें शुभ फल देते हैं। इसलिए हमेशा ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था रखते हुए शुभ कर्म करते रहें, आपको निश्चित ही श्रेष्ठ फल मिलेगा और सारे दुख दूर होंगे।
​इच्छा पूर्ति और मंत्र विज्ञान का रहस्य
​मंत्र साधना को समझने के लिए इसके विज्ञान को जानना बेहद जरूरी है। हमें यह पता होना चाहिए कि:
​देवता का कौन सा रूप सुखकारी है और मोक्ष की ओर ले जाएगा?
​कौन सा रूप केवल पापों को काटकर सीधे मोक्ष प्रदान करेगा?
​कौन से मंत्र कीलित हैं, कौन से प्रायोगिक हैं और उनके करने का सही विधान व लाभ क्या हैं?
​मंत्र एक विज्ञान है। जिस तरह भौतिक जगत में किसी वस्तु को बनाने के लिए अलग-अलग पुर्जों (Parts) को जोड़ा जाता है, ठीक वही प्रक्रिया मंत्रों की भी है। फर्क सिर्फ इतना है कि भौतिक चीजें हमारे सामने होती हैं जिन्हें हम हाथों से बनाते हैं, जबकि मंत्र सूक्ष्म जगत (Spiritual World) में कार्य करते हैं।
​जब हम अपनी किसी इच्छा पूर्ति के लिए मंत्र का जप करते हैं, तो वह वायुमंडल में तैरता है। मंत्र की एक निश्चित संख्या (मात्रा) पूरी होने पर, उस मंत्र से संबंधित एक सूक्ष्म रूप तैयार हो जाता है। वह सूक्ष्म ऊर्जा उपासक के चारों ओर ऐसा वातावरण बना देती है जिससे उसकी मनोकामना स्वतः ही पूर्ण हो जाती है।

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admin

Mantra gyan

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6 Responses

  1. Monty says:

    बहुत सुंदर जानकारी🌹🌹

  2. Balram says:

    गूढ़ पर समझने योग्य स्पष्ट जानकारी

  3. Mahaveer says:

    जयगुरुदेव

  4. Sunita sharma says:

    Ati sunder

  5. Sunita says:

    Ati sunder

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