तंत्र साधना

*तंत्र में रुचि तंत्र की रुझान सदियों से है ,आज के समय लोग प्रचार प्रसार देख के जायदा आकर्षित हैं की तंत्र सीखूं और आगे डेरा जमा लूं या कोई शक्ति सिद्ध कर लूं तरह तरह के भ्रमित प्रचार रोज आते हैं लाखो लोग खुद को तांत्रिक कह सिद्धियां करवाने का ट्रांसफर करने ला लोभ दे ठगी करते है*

*तंत्र का अर्थ है मंत्र की क्रिया मंत्र के द्वारा कार्य करना,इस में अनेकों  तरह के प्रयोग समझिए इसी में अनुष्ठानिक किर्या भी होती है कोई भी व्यक्ति मंत्र जपता है उसको तंत्र ही कहेंगे,सभी मंत्र संबंधित विधान होते हैं हर कार्य संबंधित मंत्र होते है पूरा एक गुढ़ विधान है सब जानने सीखने में एक लंबा समय लगता है धीरे धीरे करते करते सीखा जाता है*
*जो लोग सिद्धि के चक्र में पड़ते हैं वह ठग लिए जाते हैं और रोज ही ठगे जाते हैं*

*तंत्र का मूल अर्थ है ईश्वरीय उपासना देवता का कोई भी एक रूप इष्ट हो पंचदेव उपासना हो जीवन का आनंद ही अलग है जीवन में चमत्कार होते है जो समझ पाए लेकिन ऐसा कोई चमत्कार नहीं होता की लो  धन बरसा लूं किसी को उजाड़ दूं  किसी को पछाड़ दूं धरती से धन निकाल लूं लेकिन खुद के लिए जीवन में चमत्कार होते है इस में कोई शक नही और आत्मा उन्नत हो मोक्ष का अधिकारी होता है*

admin

Mantra gyan

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4 Responses

  1. Prabhat Kumar Mishra says:

    शानदार जानकारी गुरुदेव

  2. जितेन्द्र झा 'गुड्डू' says:

    🙏🙏🙏🙏🙏🙏

  3. पंकज कंवर says:

    बहुत ही सरलता से समझाया अपने, अति धन्यवाद।।

  4. Mahaveer jain says:

    जय गुरुदेव

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