Category: साबर मंत्र

मैने जितना अध्ययन किया है उसके अनुसार तो यह सूर्य/चंद्रमा प्रभाववान होता है यदि गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो तो इसे इड़ा या चंद्र से प्रभावित मानते हैं। जो हमारा बायां स्वर है. यह हमारी इड़ा नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है,सूर्य और चंद्रमा की सांसों के आदान-प्रदान के दौरान हमारी नाक में दो स्वर चलते हैं,अगर हम बाईं नाक से सांस ले रहे हैं तो इसका मतलब है कि हमारा बायां स्वर काम कर रहा है और हमारी इड़ा नाड़ी जागृत है तो इसका मतलब है कि हमारा दिन शांत और स्थिर रहने वाला है, घर के बाईं ओर सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। अपरंच दाहिना स्वर हमारी पिंगला नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है, यदि हम दाहिनी नाक से सांस ले रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हमारा दाहिना स्वर काम कर रहा है और हमारी पिंगला नाड़ी सक्रिय है,दायां स्वर जागृत होने का अर्थ है कि यह स्वर सूर्य की ऊर्जा से प्रभावित होता है और आज हमारा दिन ऊर्जावान रहने वाला है जिस गणेश प्रतिमा की सूंड दाहिनी ओर मुड़ी हुई हो ऐसी मूर्ति के स्वरूप की पूजा करने से बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं ऐसा गणेश पुराण में लिखा है किन्तु इसमें विधि विधान में किसी प्रकार की गलती नहीं चलती एवं मंगलप्रभाव से यह उष्ण प्रभावी अधिक ऊर्जा वान मूर्ति होती है जिन्हें सावधानी पूर्वक यजन करना पड़ता है 0

मैने जितना अध्ययन किया है उसके अनुसार तो यह सूर्य/चंद्रमा प्रभाववान होता है यदि गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो तो इसे इड़ा या चंद्र से प्रभावित मानते हैं। जो हमारा बायां स्वर है. यह हमारी इड़ा नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है,सूर्य और चंद्रमा की सांसों के आदान-प्रदान के दौरान हमारी नाक में दो स्वर चलते हैं,अगर हम बाईं नाक से सांस ले रहे हैं तो इसका मतलब है कि हमारा बायां स्वर काम कर रहा है और हमारी इड़ा नाड़ी जागृत है तो इसका मतलब है कि हमारा दिन शांत और स्थिर रहने वाला है, घर के बाईं ओर सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। अपरंच दाहिना स्वर हमारी पिंगला नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है, यदि हम दाहिनी नाक से सांस ले रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हमारा दाहिना स्वर काम कर रहा है और हमारी पिंगला नाड़ी सक्रिय है,दायां स्वर जागृत होने का अर्थ है कि यह स्वर सूर्य की ऊर्जा से प्रभावित होता है और आज हमारा दिन ऊर्जावान रहने वाला है जिस गणेश प्रतिमा की सूंड दाहिनी ओर मुड़ी हुई हो ऐसी मूर्ति के स्वरूप की पूजा करने से बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं ऐसा गणेश पुराण में लिखा है किन्तु इसमें विधि विधान में किसी प्रकार की गलती नहीं चलती एवं मंगलप्रभाव से यह उष्ण प्रभावी अधिक ऊर्जा वान मूर्ति होती है जिन्हें सावधानी पूर्वक यजन करना पड़ता है

2

सोमवती अमावस्या का महत्व

सोमवती अमावस्या का महत्व सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या सोमवती अमावस्या कहलाती है, हिंदी मास के अनुसार प्रत्येक मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन...

0

पेड़ो की जड़ो से ले रत्नों का काम

|| पेड़ो की जड़ो से ले रत्नों का काम || ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की अनुकूलता के लिए कई उपाय बताये गए है उनमें से रत्न धारण करना भी एक उपाय है। असली रत्न...

0

शयन विधान

शयन विधान : हमारी दिनचर्या का महत्वपूर्ण अंग है शयन। शयन अर्थात सोना, नींद लेना। मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी शयन करते हैं। शयन किस तरह हमारे स्वास्थ्य और चेतना के लिए लाभदायी हो सकता...

0

ताम्बे के बर्तन में रखा पानी पीने से लाभ एवं औषधीय प्रयोग

ताम्बे के बर्तन में रखा पानी पीने से लाभ   आप हमेशा यात्रा करते रहते हैं जहां अपने अनुसार खान-पान नहीं हो पाता तो छोटे-मोटे ज़हरीले तत्व हमेशा किसी-न-किसी रूप में आपके अंदर पहुंच...