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भगवान 12

भगवान

त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं। वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।। मैं ईश्वर,भगवान,देवता हूं, मेरे कई नाम कई रूप है,यह अखिल विश्व ब्रम्हांड, ये पूरी सृष्टि “मैं” ही हूं, मैं तटस्थ (न्यूट्रल) हूं,...

कर्म 7

कर्म

जिस तरह धरती में जिस अन्न,फल,पेड़,पौधे का बिज डालते हैं वही उपजता है इसी तरह व्यक्ति के कर्म हैं आप जो करते हैं वह प्रकर्ति में स्फुरित होते हैं अच्छा या बुरा जो चलता...

तंत्र क्रिया 6

तंत्र क्रिया

तंत्र क्रिया दुष्ट परवर्ती के लोग करते है जो शास्त्र जानने वाला होगा वह कभी किसी पे गलत तंत्र प्रयोग नहीं करेगा क्यों कि वो दंड जनता है लेकिन दुष्ट व्यक्ति का बाहरी रूप...

ठग 13

ठग

झूठहूं लेना झूठहूं देना झूठहूं भोजन झूठहूं चबेना .. बोली मधुर ,वचन जिमि मोरा .. खाई महा, अति हृदय कठोरा.. जितने भी यह आडम्बरकारी बहरूपिए हैं, यह सभी इस तुलसी रामायण चौपाई में कहे...

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तंत्र साधना

*तंत्र में रुचि तंत्र की रुझान सदियों से है ,आज के समय लोग प्रचार प्रसार देख के जायदा आकर्षित हैं की तंत्र सीखूं और आगे डेरा जमा लूं या कोई शक्ति सिद्ध कर लूं...