कर्म
जिस तरह धरती में जिस अन्न,फल,पेड़,पौधे का बिज डालते हैं वही उपजता है इसी तरह व्यक्ति के कर्म हैं आप जो करते हैं वह प्रकर्ति में स्फुरित होते हैं अच्छा या बुरा जो चलता उसी आधार हमारा जीवन है
पूर्व जन्म से किए गए कर्म का भोग यह जीवन है और इस जीवन के कर्म आधारित अगला जन्म है
पुण्य कर्म देवताओ के मंन्त्र जप हैं पूर्व जन्मपाप कर्म काटने के लिए ही हैं पापक कर्म को क्षीण करते हैं पापक कर्म शैने शैने खत्म होते है लेकिन जैसे किसी भी दंड की सजा जज कम या ज्यादा कर सकता है लेकिन सजा निश्चित है इसी तरह पापक कर्म की सजा ईश्वरीय उपासना करने से हल्की हो जाती है और ओर कम से कम भुगतनी पड़ती हैं और उपासना से जो पुण्य अर्जित किया वह हमारे लिए शुभ कर्म होगा जो मोक्ष में सहायक होता है

चरण स्पर्श गुरुदेव
Gurudev ka margdarshan esse ho milta rahe. Jai ganesh.pranaam gurudev
Bahut badhiya
सादर प्रणाम
हर हर महादेव गुरुजी🙏
🙏
जय गणपती गणनाथं