मंत्र और ठग
तंत्र हर एक युग में शरण स्थल रहा है और हर युग में बीज या सुप्त अवस्थता में रहा है जो हमारे ऋषि हैं वह सत्यपुरुष ही कहे जाते हैं वह आज भी हैं लेकिन हमको नहीं मिलते अगर भाग्य है या गुरु कृपा है तो अवश्य मिलते हैं।
हम जिस युग में जी रहे हैं ये हमारी विवशता है हमारे कर्म प्रधान है अन्यथा आज का वातावरण ओर मनुष्य की चाह बहुत खराब है
व्यवहार में हम देखते है हर कोई अपने जो सिद्ध कर बड़ा दिखाने की होड में लगा है भले उसको कुछ आवे ना आवे अगर हम आप या कोई जानकार उनका विरोध करे तो वह कहते है इस से क्या होता है जबकि प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष हम रूप में हम अपने को शुद्ध रखे हुए है फिर भी उनकी विकृत मानसिकता और असद आचरण झूठ बिगाड़े हुए मंत्र उल्ट सुलट साधना और मंत्र का हम पर किसी न किसी रूप में प्रभाव जरूर पड़ता है जिस तरह पैर में चुभा कांटा हमारे शरीर के स्वस्थ अंगों को भी दर्द से अस्वस्थ कर देता है ।
ऐसा ही निदान है अशांत एवं नीरस मन का जो ईश्वर की तरफ जाना तो चाहता है लेकिन तंत्र के नाम से ठगो का झुंड उनको कहीं का कहीं ना भेज दे ये भी डर है।
गलत आचरण पैसे की चाह ने इतने पाखंडी अधम लोगों ने वातावरण दूषित कर दिया है और तंत्र के मार्ग को पूरी तरह दूषित कर दिया है
आगे फिर कभी लिखूंगा

जी गुरुदेव, सत्य वचन. मनुष्य का सौभाग्य हो तो ही सही ठिकाने पर पहुंचता है 🙏
बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी
बिल्कुल सही बात है। ठगों ने अपने स्वार्थ के लिए सब ख़राब कर रखा है।
🙏🙏🙏🙏🙏
सत्य वचन गुरुदेव
चरण स्पर्श गुरुदेव 🙏🏻🙇🏻♂️
आपकी वाणी और शब्द संयोजन कितना स्पष्ट है, की सारे भ्रम एक बार में मिट जाते हैं।
हम बड़े भाग्यशाली हैं जो आपकी कृपा प्रसाद मिल रहा है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙇🏻♂️🙇🏻♂️🙇🏻♂️
जय गुरुदेव
जय गणपति
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
बिल्कुल सही कहा अपने, तंत्र का नाम आते ही लोगों को पाखंड नजर आता है, क्योंकि आजकल मंत्र, तंत्र के नाम पर बेचे जाते हैं। आप जैसा मार्गदर्शक मिले तो तंत्र मंत्र से डर नहीं लगता है और इस मार्ग पर और आगे बढ़ने की हिम्मत होती है। आपका धन्यवाद।