Category: साबर मंत्र

नियति 5

नियति

न व्यक्ति भगवान की तरफ दो वजह से ही आता है या तो जीवन में जब कठिनाई हो या फिर मन ईश्वर की तरफ हो। जीवन में जब हम कठिनाई से घिरते हैं तब...

विचारणीय 0

विचारणीय

आज का समय ऐसा है सच ओर सही मार्ग बताने वाले को मूर्ख समझा जाता है उसकी मानेंगे नहीं क्यों कि मंत्र रूपी सस्ता जहर खाने की आदत हो चुकी है महंगा अमृत लेना...

भगवान 12

भगवान

त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं। वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।। मैं ईश्वर,भगवान,देवता हूं, मेरे कई नाम कई रूप है,यह अखिल विश्व ब्रम्हांड, ये पूरी सृष्टि “मैं” ही हूं, मैं तटस्थ (न्यूट्रल) हूं,...

कर्म 7

कर्म

जिस तरह धरती में जिस अन्न,फल,पेड़,पौधे का बिज डालते हैं वही उपजता है इसी तरह व्यक्ति के कर्म हैं आप जो करते हैं वह प्रकर्ति में स्फुरित होते हैं अच्छा या बुरा जो चलता...