विचारणीय
आज का समय ऐसा है सच ओर सही मार्ग बताने वाले को मूर्ख समझा जाता है उसकी मानेंगे नहीं क्यों कि मंत्र रूपी सस्ता जहर खाने की आदत हो चुकी है महंगा अमृत लेना नहीं इधर उधर से मंत्र ज्ञान लेना है यू ट्यूब,फेसबुक,इंस्टा पे सार्वजनिक मंत्र बांटने वालों भीड़ है ,मंत्र बेचने वालों की भी भीड़ है,शास्त्र कहता है अदीक्षित को मंत्र जप का अधिकार नहीं इधर उधर से मंत्र एकत्र कर जपने से व्यक्ति गर्त में चला जाता है, एक ही गुरु का बताया सही से जपने से जीवन अनंत सुख और खुशी से भरता है समय लग सकता है लेकिन निश्चित है ,अलग अलग जगह से लिए मंत्र हो सकता है एक दूसरे से विरोधाभासी हों गुरु को ये समझ होती है कि कोनसा मंत्र किस मंत्र का विरोधाभाषी है और उसको कहां जप किया जाए ।
अशोक भारद्वाज
ये झूठा मंत्र रूपी जहर खाने से अच्छा है सिर्फ दिया बत्ती कर के प्रणाम कर लिया जाए

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