Mantar ucharn or prbhav
बहुत से लोग मंत्र लिख के कह देते हैँ दीक्षा लिए बिन ही जप सकते हैँ लेकिन बिन दीक्षा कोई भी मंत्र जप नही हो सकता, शास्त्र अनुसार आदिक्षित को मंत्र जप का अधिकारी नही होता जो लोग सार्वजनिक मंत्र लिखते हैँ अब मंत्र तो लिख दिए अब इनका उच्चारण कौन ठिक करवाएगा और उच्चारण सही नही होगा तो मंत्र देवता श्रापित कर के तटस्थ हो जायेगा फिर उसका जो दंड मिलता है वह भयानक है बहुत से लोग मन मुखी स्तोत्र, मंत्र पुस्तक से भी उठा के करते हैँ लेकिन इन सब से लाभ कम हानि ज्यादा होती है कुछ का रिजल्ट करते करते दीखता कुछ का थोड़ा समय बाद समझ आता है, इसी तरह धीरे धीरे कुछ आभास होने लगता है किसी को परछाई दिखती है या स्वप्न मे दीखते हैँ स्वप्न मे मंत्र दीखते हैँ तो व्यक्ति इस भ्र्म मे रहने लगता है की मंत्र देवता दिखने लगा फिर शरीर मे दिक्क़त होने लगती लेकिन अनुभव की परछाई उसकी भर्मित रखती है धन हानि होने लगती आलस्य रहता है फिर भी वह इस तरह के भ्र्म मे ही रहता है की मंत्र देवता उसके साथ है और अगर वह चाहे की मै उपाय कर लूँ तो सामने वाले व्यक्ति के लिए गलत विचार डालेगा

जय श्री राम
जय श्री गुरूजी महाराज