भक्त और शिष्य

*भक्त गुरु को समर्पित नही होता और शिष्य गुरु के प्रति सम्पूर्ण समर्पित होता है भक्त श्रद्धालु होता है और शिष्य समर्पित।  गुरु के प्रति समर्पण से देवताओं की साधना करने वाला इस लिए उसको ज्ञान और देव उपासना का बल होगा और उसको मोक्ष तक का मार्ग सुलभ है।*
*भक्त वह होता है जो गुरु की पूजा करते हैं उनका प्रचार करते घूमते है उनकी प्रशंसा में ढोल पिटते घूमते है प्रचार माध्यम से।*
*और शिष्य  वह होता है जो गुरु चरणों में समर्पित हो उनका आज्ञानुवर्ती बने,उनका अनुगामी बने तो भक्त और शिष्य दोनो अलग अलग हैं भक्त विभक्त हो सकता है लेकिन शिष्य कभी गुरु से दूर नही हो सकता शिष्य शिशु की तरह गुरु गुरु चरणों में रहता है जैसे एक मां अपने बच्चे को रखती है गुरु भी शिष्य को ऐसे रखता है*

admin

Mantra gyan

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6 Responses

  1. Khushal trivedi says:

    प्रणाम गुरुदेव🙏

  2. sudarshan says:

    Jay shri Ganesh

  3. HARSH VARDHAN DAVE says:

    चरण स्पर्श गुरुदेव 🙏🏻🙇🏻‍♂️
    जय गणपति 🙏🏻🙇🏻‍♂️
    🙇🏻‍♂️🙇🏻‍♂️🙇🏻‍♂️🙇🏻‍♂️🙇🏻‍♂️

  4. Jitendra jha says:

    सादर चरण स्पर्श गुरुदेव🙏🙏🙏

  5. पंकज कंवर says:

    बहुत सुंदर अंतर बताया अपने गुरुदेव।।

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