तंत्र मे मेरे अनुभव
तंत्र मे मेरे अन्यभव
गणपति और कृष्ण दोनों तांत्रिक संध्या विधान मे विपरीत हैँ। मेरे ईस्ट गणपति हैँ कृष्ण मेरी आत्मा के पिता, मुझे बरसो हो गए गणपति और कृष्ण सेवन करते हुए गणपति, गणपति ब्रह्म रूप सुख और हर वबस्था दाता हैँ और कृष्ण एक भाव, कृष्ण विषय मे चर्चा के बाद मन इतना व्याकुल हो जाता है मुख से शब्द ही बंध हो जाते हैँ और शरीर आत्मा व्याकुलता के कारण 2,3 घंटे ही निस्तेज हो जाती है वास्तव मे कृष्ण प्रेम हैँ आत्मा को आध्यात्मिक लोक की सैर हाथ पकड़ के करवाते हैँ आत्म समोहन हो जाता है*। तंत्र मे बहुत गूढ है लेकिन गुरु शिष्य संबंध बिन कुछ खुलता नही जब शिष्य समर्पण भाव से गुरु मे उत्तर जाता है तब तंत्र का गूढ खुलता है, वैसे तो बिन रोये मा भी बच्चे को दूध नही पिलाती

जब दोनों ही तांत्रिक संध्या में विपरीत है गुरुदेव तो सेवन दोनों का एक साथ कैसे🤔
सभी के विधान होते हैँ ना मोहन जी समय आने पे आपको भी मिलेगा
जी
जय श्री राम
जय श्री गुरूजी महाराज
जय गुरूदेव
जय श्री राम 🛕
हर हर महादेव 🛕
दंडवत प्रणाम गुरुदेव 🙏🌹🙇
चरण स्पर्श गुरुदेव