कालसर्प योगों के प्रकार

गतांक से आगे……

हम इस लेख में कालसर्प योगों के प्रकार पर प्रकाश डालेंगे…..

कालसर्प योगों के प्रकार :

राहु – केतु के विभिन्न राशियों में भ्रमण करने एवं विभिन्न भावो को प्रभावित करने की स्थिति में अनेक प्रकार के कालसर्प योगों का निर्माण होता है ! मूलरूप से कालसर्प योग के बारह प्रकार होते हैं,जो विश्वविख्यात सर्पों के नाम पर आधारित हैं,जो इस प्रकार है….
कालसर्प योग के नाम भाव में राहु की स्थिति भाव में केतु की स्थिति
१. अनंत काल सर्प लग्न में राहु सप्तम भाव में केतु
२.कुलिक कालसर्प योग धन या द्वितीय भाव में राहु अष्टम भाव में केतु
३. वासुकि कालसर्प योग तृतीया भाव में राहु नवम भाव में केतु
४.शंखपाल कालसर्प योग चतुर्थ या सुख भाव में राहु दशम भाव में केतु
५.पदम् कालसर्प योग पंचम भाव में राहु एकादश भाव में केतु
६.महापदम कालसर्प योग छठे भाव में राहु द्वादश भाव में केतु
७.तक्षक कालसर्प दोष सप्तम भाव में राहु लग्न में केतु
८. कर्कोटक कालसर्प योग अष्टम भाव में राहु द्वितीय या धन भाव में केतु
९. शंखचूड़ कालसर्प योग नवम भाव में राहु तृतीया भाव में केतु
१०.घातक कालसर्प योग दशम भाव में राहु चतुर्थ भाव में केतु
११. विषाक्त कालसर्प योग एकादश भाव में राहु पंचम भाव में केतु
१२.शेषनाग कालसर्प योग द्वादश भाव में राहु छठे भाव में केतु

इन्हें यदि 12 लग्नों में विभाजित कर दें तो 12 x 12 =144 प्रकार के कालसर्प योग संभव हैं ,परन्तु 144 प्रकार के कालसर्प योग तब संभव हैं जब शेष 7 ग्रह राहु से केतु के मध्य स्थित होँ , यदि शेष 7 ग्रह केतु से राहु के मध्य स्थित होँ, तो 12 x 12 = 144 प्रकार के कालसर्प योग संभव हैं ! इसी प्रकार से कुल 144 + 144 = 288 +12 (मुख्य कालसर्प योग) ,अर्थात कुल मिलाकर 300 प्रकार के कालसर्प योग स्थापित हो सकते हैं , इन सभी प्रकार के कालसर्प योगों का प्रतिफल एकदूसरे से भिन्न होता है !
हमारा निरंतर प्रयास यही रहता है कि हम लेख से सम्बंधित सटीक एवं विश्वसनीय जानकारी आप सभी तक पहुंचाते रहे,” यही हमारा उद्देश्य और यही हमारी कामना है !”

TO BE CONTINUED………………..

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