Monthly Archive: July 2017
शिवपूजन और बिल्वपत्र “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् । त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।” अर्थात्–तीन दल वाला, सत्त्व, रज एवं तम:स्वरूप, सूर्य-चन्द्र-अग्नि–त्रिनेत्ररूप और आयुधत्रय स्वरूप तथा तीनों जन्मों के पापों को नष्ट करने वाला बिल्वपत्र मैं...
जगत के कण-कण में है महादेव का वास. तभी तो महादेव हर रूप में करते हैं भक्तों का कल्याण. फिर चाहे महादेव की प्रतिमा की पूजा हो या फिर लिंग रूप उनकी आराधना. धरती...
बिल्वपत्र की महिमा बिल्ववृक्ष साक्षात् शंकररूप है। ब्रह्मा आदि देवता शक्ति प्राप्त करने के लिए बिल्ववृक्ष के नीचे आकर बैठते हैं। आशुतोष शिव को बिल्वपत्र कितना प्रिय है, इसका अनुमान इस कथानक से लगाया...
# सर्वार्थ साधक मंत्र गुरू मंत्र के तराहा ही कल्पवृक्ष है जो किसी भी शाबर मंत्र मे सफलता देने हेतु साहाय्यक माना जाता है. सर्वार्थ साधक गुरू मंत्र की 21 बार जप करे, मंत्र-...
हिंदु पंचांग के अनुसार सभी मासों को किसी न किसी देवता या देवी के साथ संबंधित देखा जा सकता है उसी प्रकार श्रावण मास को भगवान शिव जी के साथ देखा जाता है यह...
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